कांग्रेस बोली- भाजपा का असल चेहरा आया सामने, जाने फिर भाजपा ने क्या कहा

चंडीगढ़ | गणतंत्र दिवस पर लाल किले पर भड़की हिंसा से देशवासियों में काफी ज्यादा रोष है. जैसा कि आप सभी जानते होंगे कि हर कोई इस घटना की निंदा तो कर ही रहा है अब तो सभी अपने-अपने अंदाज में इस घटना का विरोध भी कर रहा है. आपको बता दे कि इसी को लेकर चंडीगढ़ में अब तक दो तिरंगा यात्राएं निकाली जा चुकी है. इसके अलावा, वहा पर दीप सिद्धू और लक्खा सिधाणा के पुतले भी फूंके गए हैं.

Kisan Andolan

इसके साथ ही, शहरवासियों ने यहाँ भी मांग की है कि उन सभी अराजक तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए. साथ ही, चंडीगढ़ में भी इसी को लेकर राजनीति भी गर्मायी हुई है. हालांकि सभी ने इस घटना की निंदा भी की है. हालांकि अब दिल्ली बार्डरों को लगातार खाली भी करवाया जा रहा है और कुछ ने वहां से वापसी भी कर ली है. इसके अलावा, अभी भी कुछ लोगो का रवैया अड़ियल है. ऐसे लोगों को भाजपा नेताओं का कहना है कि अब दिल्ली के बॉर्डरों पर बैठे किसानों को अपना आंदोलन खत्म कर देना चाहिए. हालांकि, अभी भी आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है.

भाजपा का असल चेहरा आया सामने

चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा ने कहा कि भाजपा ने अपने लोगों को भेजकर लाल किले पर जो ड्रामा करवाया है, यह और कुछ नहीं बल्कि किसानों को बदनाम और शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे किसानों को बांटने की साजिश थी. जबकि कांग्रेस ने कभी भी किसी हिंसा या आपस में बांटने वाला काम किया ही नही. इसके अलावा, प्रदीप छाबड़ा ने कहा कि लाल किला पर जो कुछ भी हुआ, वह देश के हित में नहीं था. यह पूरी तरह से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली पुलिस की नाकामी ही है. भाजपा हमेशा से ही अपने सच को छुपाने में माहिर रही है. लेकिन, इस घटना के बाद उसका असल चेहरा सामने आ गया है.

वहीं कांग्रेस नेता एवं पूर्व मेयर सुभाष चावला ने कहा कि शांतिपूर्वक आंदोलन को कमजोर करने के लिए भाजपा ने अपने एजेंटों को भेजकर लाल किले पर यह हिंसा जानभूझकर करवाई है. साथ ही, उन्होंने कहा कि दिल्ली हिंसा नहीं होनी चाहिए थी. चावला ने इस घटना की जांच सुप्रीम कोर्ट के जज से करवाने की मांग की है ताकि सभी लोगो तक सारी सच्चाई सामने आ जाए.

शरारत थी या प्लानिंग, जांच का विषय

आप चंडीगढ़ के संयोजक प्रेम गर्ग ने कहा कि उपद्रव करने वालों को लाल किले में घुसने देना शरारत थी या प्लानिंग, यह जांच का विषय है. ये वही लोग हैं जो किसान आंदोलन को बदनाम करना चाहते थे. पर जो भी हुआ गलत हुआ. आरोपियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. तिरंगा हम सबका है, किसी भी साजिश के तहत इसका अपमान असहनीय है.

आंदोलन स्थगित कर किसान संघर्ष समिति दोबारा करे सरकार से बात

वहीं पूर्व सांसद सत्यपाल जैन का कहना है कि किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान जो हिंसा हुई है उसे देखते हुए किसान संघर्ष समिति को अपना आंदोलन अभी स्थगित कर देना चाहिए. ठीक वैसे ही जैसे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अपने एक आंदोलन में हिंसा होने के बाद उसे बीच में ही स्थगित कर दिया था. किसान आंदोलन को स्थगित करने के बाद केंद्र सरकार से दोबारा बात करके इस समस्या का हल निकालना चाहिए.
चहीं भाजपा चंडीगढ़ के अध्यक्ष और पूर्व मेयर अरुण सूद ने कहा कि देश की राजधानी में लाल किले पर जो हिंसा हुई है उसको लेकर सभी लोगो के मन में नाराजगी है. हमारे राष्ट्रीय ध्वज का अपमान असहनीय है. इसलिए ऐसे कृत में शामिल सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए. दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार ने पहले ही यह आशंका जता दी थी कि कुछ असामाजिक तत्व इस आंदोलन को ख़राब कर सकते है. ये लोग देश और किसान के हितकार नहीं, बल्कि मोदी सरकार के खिलाफ हैं. ऐसे में इस समय किसानों को चाहिए कि समझदारी दिखाते हुए यह आंदोलन खत्म कर दें, यही उनके हित में भी है.
अभी देखना यह होगा की किसान अब आगे क्या कदम उठाते है.

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