कम हो सकता है NCR का क्षेत्रफल, पानीपत हो सकता है एनसीआर दायरे से बाहर

पानीपत | आने वाले समय में दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (Delhi NCR) का क्षेत्रफल करीब 24% तक कम हो सकता है. ऐसे में बताया जा रहा है हरियाणा का पानीपत एनसीआर के दायरे से बाहर (Panipat out Delhi NCR) हो सकता है. दरअसल, इसके लिए हरियाणा ने एनसीआर के तहत अपने क्षेत्र को कम करने का प्रस्ताव दिया है, जिसके बाद ये फैसला आ सकता है कि पानीपत को एनसीआर से बाहर किया जा सकता है. वही इस फैसले को लेकर पानीपत के उद्योग जगत की पैनी नजर बनी हुई है, क्यूंकि पानीपत और मतलौडा क्षेत्र के बाहर होने से उधमियों और जनता को विशेष फायदा मिल सकता है.

Manohar Lal Khattar CM Haryana

सूत्रों की मानें तो हरियाणा के इस प्रस्ताव के बाद अन्य तीन राज्यों ने हरियाणा के प्रस्ताव पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं की है, ऐसे में इस मंजूरी का रास्ता साफ़ हो गया है. वही अब पानीपत के उधमी पानीपत और मतलौडा क्षेत्र को एनसीआर से बाहर होने की उम्मीद लगाए बैठे है. पानीपत इंंडस्ट्रीज एसोसिएशन प्रधान सरदार प्रीतम सिंह ने बताया कि एनसीआर से पानीपत के बाहर होने से एनजीटी की सख्त पाबंदियां हट जाएगी. जिससे उद्योगों को काफी राहत मिलेगी. इसके साथ ही उनके नए उद्योग स्थापित करना का रास्ता भी साफ हो जायेगा.

वर्तमान में यहां नए उद्योग स्थापित करने के लिए काफी दिक्क्तों का सामना करना पड़ता है. एनसीआर क्षेत्र में जहां उद्योग चलाने के लिए पीएनजी गैस जरूरी है तो वही एनसीआर क्षेत्र से बाहर के उद्योगों में पेट कोक , कोयले का इस्तेमाल किया जा सकता है. जिससे उत्पादन करना बेहद सस्ता हो जाता है.

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जारी आंकड़ों के अनुसार क्षेत्रीय योजना 2021 में जहां एनसीआर में हरियाणा का सांकेतिक क्षेत्र 13,413 वर्ग किमी था, वहीं 2018 तक और जिलों को जोड़ने के कारण वास्तविक क्षेत्र बढ़कर 25,327 वर्ग किमी हो गया. इस दौरान हरियाणा के पांच और जिले करनाल, जींद, महेन्द्रगढ़, चरखी दादरी और भिवानी एनसीआर के दायरे ने शामिल हो गए.

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पानीपत- मतलौडा के एनसीआर से बाहर से मिलेंगे ये फायदे

– हर साल एनसीआर में होने के कारण नवम्ब्र और दिसंबर महीने में में 15 दिनों के लिए उद्योगों को बंद नहीं करना पड़ेगा.

– 2000 उद्योगों को पीएनजी कनेक्शन होने पर उद्योगों को दूसरी जगह शिफ्ट नहीं करना होगा.

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– नए उद्योग स्थापित करने पर पीएनजी कनेक्शन की शर्त नहीं होगी.

– अधिक संख्या में नए उद्योग स्थापित होने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे

बता दें हरियाणा की पिछली सरकारें हमेशा इसके ठीक विपरीत कदम उठाती थी. पिछली सरकारों ने हमेशा अपने क्षेत्र को एनसीआर में शामिल करने का प्रयास किया है. ऐसा पहली बार हो रहा है जब कोई सरकार अपने क्षेत्र को एनसीआर से हटाने का प्रस्ताव रख रही है. वही अब देखना होगा इसका फैसला कब होता है और इसके क्या परिणाम निकल कर आते है.

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