जूते बेचने वाले का बेटा बना UPSC: IAS अफसर, UPSC में 6वीं रैंक लाकर किया पिता का सपना साकार !

UPSC|   कहा जाता है ‘अगर इंसान में कुछ कर गुजरने की चाह हो तो हर काम आसान हो जाता है’ कुछ ऐसा ही राजस्थान के एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले बेटे ने किया है. शुभम गुप्ता नाम के इस लड़के ने यूपीएससी परीक्षा में 6वीं रैंक लेकर अपने पिता का सपना साकार कर दिया है. शुभम ने देश की सबसे कठिन परीक्षा में टॉप कर अपने परिवार का नाम रोशन कर दिया है. इस सफलता के पीछे शुभम की कड़ी मेहनत, लगन और उनके पिता का सपना है. दरअसल, शुभम गुप्ता के पिता अपने बेटे को IAS अफसर बनते देखना चाहते थे, और उनके बेटे ने उनके इस सपने को सच में बदल दिया. आइये जान लेते है आईएएस बने शुभम गुप्ता के सफलता के पीछे का संघर्ष क्या है.

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शुभम ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया की उनके पिता ने उनसे कहा था कि मैं चाहता हूं कि तुम 1 दिन बड़े अधिकारी बनों. पिता की ये बात शुभम के दिमाग में पूरी तरह बैठ गई. और इसके बाद से ही शुभम ने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी. इसके बाद एमकॉम की पढ़ाई के दौरान एक बार फिर उनके पिता ने कलेक्टर बनने के लिए दोबूारा जिक्र किया. पिता की ये बात उनके दिल में लग गई. और आज शुभम ने अपने पिता का वो सपना साकार कर दिखाया.

जानें कौन है IAS अफसर शुभम गुप्ता ?

यूपीएससी परीक्षा में 6वीं रैंक लाने वाले शुभम गुप्ता एक मध्यम परिवार से है. उनके घर की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है. शुभम राजस्थान के जयपुर शहर के रहने वाले है. और उनके पिता जयपुर में एक जूते की दुकान चलाते है. शुभम के परिवार में माता पिता के अलावा तीन भाई-बहन है. शुभम के बड़े भाई दूसरे शहर से आईआईटी की तैयारी कर रहे है. भाइयों के बाहर पढ़ाई करने की वजह से शुभम को अक्सर अपने पिता की जूतों की दुकान पर बैठना पड़ता था. शुभम ने बताया जयपुर में उनके पिता की जूते की दुकान ठीक से नहीं चलने के कारण उन्होंने महाराष्ट्र में दुकान खोलने का फैसला लिया. वही भाइयों के बाहर पढ़ाई करने की वजह से शुभम को अक्सर अपने पिता की जूतों की दुकान पर बैठना पड़ता था.

शुभम ने बताया उनकी शुरुआती पढ़ाई राजस्थान से हुई लेकिन आठवीं कक्षा के बाद उन्हें पिता के काम के सिलसिले में महाराष्ट्र जाना पड़ा. शुभम बचपन से ही पढ़ाई में तेज थे। बेसिक शिक्षा के बाद उन्होंने दिल्ली आकर श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में दाखिला लेने का प्रयास किया. लेकिन इसमें उन्हें सफलता नहीं मिली. जिस वजह से उन्होंने किसी दूसरे कॉलेज से ग्रेजुएशन और एमकॉम की पढ़ाई पूरी की.

ऐसे मिली सफलता

शुभम ने साल 2015 में पहली बार यूपीएससी की परीक्षा दी. जिसमे उन्हें असफलता मिली. और वो प्री परीक्षा भी पास नहीं कर पाए. इसके बाद साल 2016 में एक बार फिर दूसरी बार परीक्षा दी. और इस बार सफलता हाथ लगी. और 366वीं रैंक हासिल हुई. भारतीय ऑडिट एंड अकाउंट विभाग में सेवा देने का मौका मिला. लेकिन शुभम चाहते थे कि वो आईएएस अधिकारी बनें. जिसके लिए उन्होंने और अधिक मेहनत की और साल 2017 में फिर यूपीएससी परीक्षा में बैठे. लेकिन इस बार शुभम को लगातार 3 सालों तक अच्छी रैंक नहीं मिल पाई. लेकिन बावजूद इसके शुभम ने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते रहे. साल 2018 में फिर दुबारा परीक्षा दी और चौथे प्रयास में शुभम ने ना सिर्फ सफलता हासिल की बल्कि अच्छी रैंक भी हासिल की और इसके साथ ही शुभम ने 6वीं रैंक के साथ टॉप किया. इसकी ख़ुशी सबसे अधिक शुभम के पिता को थी. वर्तमान में शुभम महाराष्ट्र कैडर से अपनी सेवाएं दे रहे हैं. वो असिसटेंट कलेक्टर के पद पर गढ़चिरौली में तैनात हैं.

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