बुर्जुग नागरिकों को कानूनी सुरक्षा देगी सरकार, बेटे-बहुओं के बाद अब दामाद और बेटी को भी देना होगा भत्ता

चण्डीगढ़ | बीते दिनों देखा गया है कि बुजुर्ग माता पिता और वरिष्ठ नागरिकों के साथ हर दिन दुर्व्यवहार की घटनाएं बढ़ रही है. ऐसे में अब यही कारण है कि इन सभी घटनाओं को देखते हुए मोदी सरकार अब इससे जुड़े कड़े कानून को लागू करने जा रही है. अब सरकार द्वारा इन कानूनों को ज्यादा सख्त और व्यापक रूप दे दिया जा सकता है. ऐसे में अब न सिर्फ़ बेटे बेटियों अपितु गोद ली गई संतानों के अतिरिक्त दामाद और बहुओं को भी बुजुर्गों का गुजारा भत्ता देना पड़ेगा.

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हम आपको मुख्य रूप से बता दें कि रिश्तेदारों और परिजनों की परिभाषा को लेकर बदलाव है भी अब काफ़ी बदलाव किए गए हैं. संशोधन बिल में सबसे अधिक जरूरी बदलाव रिश्तेदारों और परिजनों की परिभाषा को लेकर है जिसे बुजुर्गों के हित में और व्यापक बनाया गया है. संशोधन बिल के मुताबिक़ अब रिश्तेदारों और बच्चों की श्रेणी में बेटा और बेटी के अतिरिक्त बहु, दामाद, पौत्र, पौत्री और नाबालिग बच्चों के अभिभावक को भी शामिल किया गया है.

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बुजुर्ग लोगो के हित में आया नया फरमान

दरअसल, हाल ही में मोदी सरकार के द्वारा संसद में पेश किए गए Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007 संशोधन बिल में हाल ही में कुछ बड़े बदलाव किए गए हैं. इस बिल में बुर्जुग नागरिकों को यह अधिकार दिया गया है कि अब से वह अपने परिजनों के अनदेखी और दुर्व्यवहार किए जाने पर वो अपने संरक्षण और रखरखाव के लिए दावा कर सकते हैं.

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बुजुर्गो को 60 से 90 दिनों के भीतर मिलेगा हक

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केवल इतना ही नहीं अपितु नैसर्गिक बेटे एवं बेटियों के अतिरिक्त गोद लिए हुए और सौतेली संतानों को भी बच्चों का दर्जा दिया गया है. इस कानून के अंतर्गत शिकायत दर्ज़ होने पर कोई भी बुजुर्ग इंसान अपने रिश्तेदारों और परिजनों के खिलाफ ट्राईब्यूनल में रख रखाव का आवेदन दे सकता हैं. यहां हम आपको मुख्य रूप से जानकारी दें दे कि सामान्य मामलों में ट्राईब्यूनल को 90 दिनों के अंदर अंदर अपना फैसला देना होगा परन्तु अगर आवेदक की उम्र 80 वर्ष से अधिक है तो उस स्थिति में 60 दिनों में फैसला देना अनिवार्य है.

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