ITR: पुराने और नए टैक्स स्लैब में कौन है बेहतर, किसमें मिलेगी ज्यादा छूट, जानिए पूरी डिटेल्स

नई दिल्ली | वित्त वर्ष 2020-21 के ल‌िए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) को भरने जमा करने की समय-सीमा 31 दिसंबर 2021निर्धारीत की गई थी इस अब यह तारीख कब से जा चुकी है तो ऐसे में यदि आप ITR दाखिल नहीं कर पाए हैं तो देय तिथि 31 मार्च, 2022 तक आगे बढ़ गई है. आगे बढ़ाई हुई इस तिथि को बिलेटेड आईटीआर (Belated ITR) कहा जा रहा है और आप बिलेटेड आईटीआर को 31 मार्च 2022 से पहले ही जमा कर सकते हैं. किसी वित्त वर्ष के लिए रिटर्न भरने की नियत समय-सीमा खत्‍म होने के बाद करदाताओं के पास बिलेटेड ITR भरने का मौका रहता है.

ITR

ITR

ऐसे में हम आपको मुख्य रूप से जानकारी दें दे कि वर्ष 2020 के बजट में टैक्स भरने के लिए दो विकल्प सभी को प्रदान किए गए थे. जिसमें पुराने और नए टैक्स स्लैब को दर्ज किया गया है. इस दौरान टैक्सपेयर्स अपनी टैक्स देनदारी के हिसाब से दोनों में से किसी एक टैक्स स्लैब का चयन कर सकते हैं.

कौन सा बेहतर…पुराना या नया टैक्स स्लैब

ख़ास बातचीत के दैरान अर्चित गुप्ता का कहना है कि टैक्सपेयर्स को अपनी आय पर हर प्रकार से छूट और कटौती का फ़ायदा प्राप्त करने के बाद लागू सामान्य दरों पर टैक्स देनदारी की गणना करनी चाहिए. ऐसे में यदि साधारण शब्दों में उदाहरण के तौर पर बात करे तो कहा जा सकता है कि पुराने स्लैब के अन्तर्गत नौकरीपेशा व्यक्ति एलटीए, एचआरए, स्टैंडर्ड डिडक्शन के लिए 50,000 रुपये की छूट का दावा कर सकता है.

इसके अतिरिक्त व्यक्तिगत करदाता हाउसिंल लोन के ब्याज और एनपीएस योगदान आदि पर इनकम टैक्स के सेक्शन 80C के अन्तर्गत 1.5 लाख रुपये तक की छूट क्लेम कर सकता है. इसी दौरान हम आपको बता दें कि करदाता को नए टैक्स स्लैब के मुताबिक़ अपनी कमाई पर टैक्स देनदारी की गणना चाहिए. इन दोनों के मुकाबले में आप अपने लिए बेहतर टैक्स स्लैब का चुनाव कर सकते हैं.

स्लैब के मुताबिक आप पर असर

कमाई/टैक्स व्यवस्था पुरानी नई

  • 2.5 लाख रुपये तक 00 00
  • 2,50,001 से 5 लाख 5 प्रतिशत 5 गई
  • 5,00,001 से 7.5 लाख 20 प्रतिशत 10 प्रतिशत
  • 7.5 से 10 लाख 20 प्रतिशत 15 प्रतिशत
  • 10 लाख से 12.5 लाख 30 प्रतिशत 20 प्रतिशत
  • 12,50,001 से 15 लाख 30 प्रतिशत 25 प्रतिशत
  • 15 लाख से ज्यादा 30 प्रतिशत 30 प्रतिशत

चुनाव करते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • जिसका बिजनेस से कोई आय नहीं है , नौकरी करने वाले या फ़िर पेंशनभोगी व्यक्ति है तो वह हर साल नई या पुरानी टैक्स व्यवस्था में किसी एक का चयन सकता है.
  • नई व्यवस्था में वरिष्ठ नागरिक अधिक कर छूट नहीं मिलती है. सबके लिए छूट की सीमा कुल 2.5 लाख रुपये ही है.
  • यदि कमाई का स्रोत कोई बिजनेस है तो फिर नई व्यवस्था चुनने के बाद सिर्फ एक ही बार पुरानी टैक्स व्यवस्था में लौट कर वापिस आ सकते हैं.
  • इसी दौरान बता दें कि जिनकी सालाना आय कुल पांच लाख रुपये से कम है तो किसी भी व्यवस्था में उन्हें टैक्स का कोई भी भुगतान नहीं करना है.

हमें Google News पर फॉलो करे- क्लिक करे! हरियाणा से जुडी ताज़ा खबरों के लिए अभी जाए Haryana News पर.