हरियाणा के चर्चित IAS खेमका का ट्वीट- सरसों व सूरजमुखी के मिले बेहतर दाम, फिर कृषि कानून काले कैसे

चंडीगढ़ | ज्यादातर विवादों में रहने वाले व ट्वीट कर अपनी बेबाक राय रखने वाले हरियाणा के चर्चित आइएएस अधिकारी डा. अशोक खेमका ने एक बार फिर ट्वीट किया है. इस दौरान खेमका ने केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों का समर्थन किया है और इन कानूनों के विरोध पर सवाल उठाए हैंं. ऐसे में उन्‍होंने इस बार किसानों को सरसों और सूरजमुखी के ज्यादा दाम मिलने का हवाला देकर पूछा है कि क्‍या कृषि कानून सचमुच काले हैं?

कृषि कानून

IAS खेमका

खेमका ने ट्वीट में इस दफा किसानों को खुले बाजार में सरसों और सूरजमुखी के अधिक दाम मिलने की बात कहते हुए, इन कानूनों का विरोध करने वालों किसानों से पूछा है कि उन्हें सप्ष्ट रूप से अपनी बात रखने का मौक़ा दिया जा रहा है ऐसे में वह बता सकते हैं कि इन कानूनों में क्या काला है? उन्‍होंने ट्वीट में लिखा है- किसानों को इस बार सरसों और सूरजमुखी का बेहतर दाम मंडी के बार मिला. क्‍या कानून सचमुच काले हैं?

बता दें कि इस बार किसानों की सरसों सात से साढ़े सात हजार रुपये क्विंटल में बिकी है, जबकि सूरजमुखी 6500 रुपये क्विंटल तक में बिक रही है.

अशोक खेमका ने एक ट्वीट के माध्यम से कहा है कि इस साल किसानों को सरसों का बेहतर मूल्य सरकारी मंडी के बाहर मिला है. हरियाणा राज्य में किसानों ने इस बार केवल 25 लाख क्विंटल सरसों सरकारी मंडियों में बेची है. करीबन दोगुणा यानी सरल शब्दों में कहा जाए तो 50 लाख क्विंटल किसानों ने मंडी से बाहर खुले बाजार में बेची है. खेमका ने सवाल किया कि ऐसा होने के बावजूद क्या नए कृषि कानून सचमुच में काले हैं?

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