Big Breaking: हरियाणा से दिल्ली तक होगा हुड्डा कमेटी की सिफारिशों का शोर, जानेंं क्या था इन सिफारिशों में

नई दिल्ली | बीते दिनों केन्द्र सरकार द्वारा लागू किए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ इस समय पर किसानों का खुल कर समर्थन कर रही कांग्रेस के बड़े नेताओं को घेरने के लिए भाजपा हुड्डा कमेटी की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए नज़र आ रही है. कहा जा रहा है कि कृषि सुधारों के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अध्यक्षता में बनाई गई कमेटी ने यह रिपोर्ट 15 दिसंबर 2010 को तत्कालीन कृषि मंत्री शरद पवार को सौंप दी थीं.

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हुड्डा कमेटी ने कही एमएसपी की गारंटी की बात

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ऐसे में कहा जा रहा है कि हुड्डा कमेटी ने उस समय पर न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी की गारंटी की बात करने के बजाय एमएसपी निर्धारण का फार्मूला सुझाया था. कमेटी ने किसान की लागत के अनुसार लगभग 50 प्रतिशत मुनाफा देकर एमएसपी तय करने का सुझाव दिया था. वही दुसरी तरफ, हरियाणा में सीएम मनोहर लाल खट्टर की सरकार के खिलाफ कांग्रेस के द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव 32 के मुकाबले 55 मतों से गिर गया है.

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पूरानी रिर्पोट निकालने वाली भाजपा सामने नहीं ला रहीं तथ्य

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यहां पर हम आपको विशेष रूप से जानकारी दें दे कि रिपोर्ट में हुड्डा कमेटी ने मंडियों को निजी इलाकों के लिए खोलने से लेकर ई- मंडी बनाने के साथ साथ अनुबंध पर खेती यानी अगर सरल शब्दों में कहा जाए तो कांट्रेक्ट फार्मिंग की अनुमति की सिफारिश की थी. इस बीच अविश्वास प्रस्ताव के दौरान भाजपा के विधायक डाक्टर अभय सिंह यादव ने जब पूर्व सीएम हुड्डा को कमेटी की रिपोर्ट को आधार बना कर सदन में घेरा तो खुद हुड्डा ने स्वीकार किया कि यह सिफारिश उनके द्वारा की गई. कहा जा रहा है कि

ऐसे में वह तब इस कमेटी में अकेले नहीं थे. साथ ही साथ यहां पर हम आपको मुख्य रूप से बता दें कि पूर्व सीएम ने सदन में यह भी कहा है कि अगर बीते दस साल पुरानी रिपोर्ट को निकाल कर लाने वाली भाजपा अभी इसके पूरे तथ्य सामने नहीं ला रही है.

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